Search This Blog

Nov 29, 2016

जिनमें असीर है कई



यूँ तो कुछ नहीं बताने को..चंद खामोशियाँ बचा रखे हैं

जिनमें असीर है कई बातें जो नक़्श से उभरते हैं


खामोशियों की क्या ? कोई कहानी नहीं...


ये सुब्ह से शाम तलक आज़माए जाते हैं

क्यूँकि हर तकरीरें से तस्वीरें बदलती नहीं 

न ही हर खामोशियों की तकसीम लफ़्जों में होती

रफ़ाकते हैंं इनसे पर चुनूंगी हर तख़य्युल को

जब  खुशी से वस्ल होगी...
                                  ©  पम्मी सिंह
.

(आसीर-कैद ,तकरीर-भाषण,रफाकते-साथ,तख़य्युल-विचारो,तकसीम-बँटवारा )

8 comments:

  1. बहुत सुंदर रचना है.

    ReplyDelete
  2. वाह!!बहुत सुन्दर

    ReplyDelete
  3. पम्मी जी आपकी रचनाओं में उर्दू शब्दों का प्रयोग अधिक होता है. मेरी उर्दू बहुत कमजोर है. मैने समझने की कोशिश की पर जेहन में अच्छी तरह से उतार नहीं पाई. कृपया सभी उर्दू के शब्दों के अर्थ भी लिखा करें. आभारी☺️

    ReplyDelete